धीरे धीरे

सलाम करता चलूं रातें काली,सफ़ेद दोपहर,सूरज आता पुरब सेजाता पश्चिम,आसमां ऊपरनीचे जहां,खाने पीने का समय सही,फिर भी,दिल का घटता वजनसोचता हूं,कहीं तुम्हारे पास तो नहीं जा रहाधीरे धीरे.... [पूरी पोस्ट]
writer ritu raj
views
11
upvote
0
downvote
0
rating
0
comments
1
[08 Feb 2010 00:23 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix