साहित्यकार माता-पिता का स्मरण कौन करता है?
खुशबू हूँ मैं फूल नहीं जो मुरझा जाऊँगा जब भी मुझको याद करोगे मैं आ जाऊँगा। ये पंक्तियां रात को टीवी पर सुनी थी, मन से निकल नहीं रही। ऐसे लग रहा है जैसे दिल में समा गयी हों। टीवी पर संगीत का कार्यक्रम चल रहा था, उसमें प्रसिद्ध गायक शान अपने पिता का स्मरण...
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Dr. Smt. ajit gupta
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[08 Feb 2010 00:18 AM]



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