ज्यूँ घटाएं रातभर जलजल हुई मल्हार से
रात भर आवाज देता है कोई उस पार सेसाथ दे अब और भी चाहा नहीं संसार सेदेख के उनको नजर भर प्यार का दरिया बहाज्यूँ घटाएं रातभर जलजल हुई मल्हार सेआज आजादी कहाँ है ये कहाँ की बंदगीआँख के आगे जफा तो जी रहे लाचार से आज जाने दे मुझे क्यूँ रोकता तकरार पे प्रेम के...
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प्रकाश पाखी
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[07 Feb 2010 22:03 PM]



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