उतर गया है बुखार सारा पड़े वो जूते तेरी गली में, उतारो जूतों से आरती सब सनम हैं आए गली हमारी । होली के स्‍पेशल तरही मुशायरे के लिये ये हैं दो मिसरे ।

सुबीर संवाद सेवा म प्र लो साहब देखते ही देखते होली का त्‍यौहार आ गया ।  अभी तो आप देखिये कि क्‍या क्‍या होता है । लेकिन फिलहाल आज तो केवल तरही के मिसरे के बारे में कुछ बातें । जिहाल-ए-मिस्कीं मकुन तगाफुल, दुराय नैना बनाय बतियाँ। अमीर खुसरो की ये रचना पहले तो इतने तरीकों... [पूरी पोस्ट]
writer पंकज सुबीर
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[07 Feb 2010 22:00 PM]

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