कबीर के श्लोक - ८

*साधना* कबीर संतन की झुंगीआ भली,भठि कुसती गाउ॥ आगि लगऊ तिह धउलहर,जिह नाही हरि को नाउ॥१५॥ इस श्लोक मे कबीर जी अपने निजि विचार व्यक्त कर रहे हैं कि यदि कोई संत है, परमात्मा का प्यारा है।ऐसे संत की छोटी सी झोपड़ी भी मुझे भली दिखती है,अच्छी दिखती है। जबकि बुरे इन्सान... [पूरी पोस्ट]
writer परमजीत बाली

अध्यात्मिक

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[07 Feb 2010 21:09 PM]

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