ब्लाग जगत है तैयार-बह रही फ़ागुनी बयार (बिरहा फ़ाग)

शिल्पकार के मुख से बसंत ऋतू आ गई है, वातावरण में रौनक छा गई है-आभासी ब्लाग जगत भी इससे अछूता नहीं है. कहीं ढोल-नंगाड़े बज रहे हैं. कही आचारज जी काला मोबिल आईल लेकर तैयार हैं पोतने को. गिरिजेश भाई ब्लागर की अम्मा से गोइठा-गोइठी सकेल रहे हैं. बस यूँ मानिये की फागुन का स्वागत... [पूरी पोस्ट]
writer ललित शर्मा

शिल्पकार

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[07 Feb 2010 20:30 PM]

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