बानगी बनारस की (एक)
अरविन्द चतुर्वेद दुनिया भर में बाजारवाद, भूमंडलीकरण की धूम मची है. इक्कीसवीं सदी उसकी दुन्दुभी बजा रही है. लेकिन अपने बनारस शहर का क्या कीजियेगा! इसके मंदिरों के घंटे-घड़ियाल की आवाज़ आज भी मद्धिम नहीं हुई और कभी-कभी तो इतनी तेज सुनाई देती है कि इक्कीसवीं...
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अरविन्द चतुर्वेद
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[07 Feb 2010 11:45 AM]



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