एक गीत : जिसने मुझे बनाया ..

हँसते रहो हँसाते रहो जिसने मुझे बनाया ,उसका ही गीत गाया दरबारियों के आगे कभी सर नहीं झुकाया मिट्टी सा भुरभुरा तन किसके लिए सजाया यह कब रहा था अपना जो अब हुआ पराया पानी के बुलबुले पर तस्वीर ज़िन्दगी की किसने अभी उकेरा किसने अभी मिटाया इस दिल के आइने पर जो गर्द सी जमी है जब भी... [पूरी पोस्ट]
writer आनन्द पाठक
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[07 Feb 2010 10:47 AM]

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