निकोलस गियेन की कविता- पहेलियाँ
दाँतों में, सुबह,और रात चमड़ी में।कौन है, कौन नहीं?......... नीग्रोउसके एक सुन्दर स्त्री न होने पर भी,वही करोगे जो उसका हुक्म होगा।कौन है, कौन नहीं?......... भूखगुलामों का गुलाम,और मालिक के संग जुल्मी।कौन है, कौन नहीं?......... गन्नाछुपा लो उसे एक हाथ...
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चन्दन
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[07 Feb 2010 10:59 AM]



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