अथ चोर पुराण एवं अन्य कवितायेँ

Kuchh kahi kuchh unkahi चोर बना सिपाही घर का,देख मेरा वाम अंग फड़का। कहा चोर ने प्रथा यही है, राजा और रंक की यारों जो चोरी में हो निष्णात, उसके गले पुष्पहार डारो, औ' ईमां का गला घोंट कर,छह फुट नीचे ज़मीं के गाड़ो, तभी देश की गाड़ी आगे बढ़ेगी, नहीं रहेगा कोई भी कड़का। देख मेरा वाम... [पूरी पोस्ट]
writer Nihar Khan
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[07 Feb 2010 05:25 AM]

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