इसे डायरी की तरह नहीं लिखा जा सका
सुबह जल्दी जाग गया थादिन भर किसी से बहस नहीं हुईपिता ने गालियाँ नहीं दीसहानुभूति नहीं दिखाई किसी नेन ही दोस्तों ने कोई काम करायाअपने ही छोटे-मोटे काम निपटा पायामसलनकपड़े धोनादाढ़ी बनानासाइकिल का टेढ़ा हैंडल सुधरवानादवाइयों की उधारी चुकानासिरदर्द कम...
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शशिभूषण
मेरी कविताई
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[07 Feb 2010 04:50 AM]



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