कुछ पंक्तियाँ

Shobhna १ कुछ पहेलियों को सुलझाती हूँ तो मैं खुद ही उलझ जाती हूँ दूसरों के सवालों का जवाब देती हूँ तो खुद ही एक प्रशन बन जाती हूँ २ मेरी हाथों की लकीरों को मैंने बदल डाला अपने वजूद को कायम रखने के लिए मैंने अपने आंसूओं पोंछ डालाफिर से जीने की चाह में मैंने फिर... [पूरी पोस्ट]
writer Shobhna Choudhary
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[07 Feb 2010 02:31 AM]

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