शब्दों की प्रेरणा-हिन्दी व्यंग्य कवितायें
दिन भर वह दोनों ज्ञानी
अपने शब्दों की प्रेरणा से
लोगों को लड़ाने के लिये
झुंडों में बांट रहे थे,
रात को लूट में मिले सामान में
अपना अपना हिस्सा
ईमानदारी से छांट रहे थे।
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शब्द रट लेते हैं किताबों से,
सुनाते हैं उनको हादसों के हिसाबों से,
पर...
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दीपक भारतदीप
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[07 Feb 2010 01:54 AM]



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