किसके चिल्लाने की बारी है-हिन्दी व्यंग्य कविता

 दीपक भारतदीप की हिंदी सरिता भ्रष्टाचार, अत्याचार और व्याभिचार को भी जाति, भाषा और धर्म के नाम पर बांटने की कोशिश जारी है, अक्लमंद दिखाते हैं बहादुरी अपने अपने हिस्से की शिकायतें उठाने में शब्द खर्च करते दूसरे की कमियां गिनाने में हर हादसे पर देखते हैं बस यही कि किसके चिल्लाने की... [पूरी पोस्ट]
writer दीपक भारतदीप

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[07 Feb 2010 01:22 AM]

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