आज की रात चांद को नहलाया जाये

सलाम करता चलूं ज़ख्म थोडा थोडा दिखाया जायेआज साथ साथ बतियाया जायेन तुम मेरे हुए न कोई तुम्हारापुराने गम को हंसके भुलाया जाये बेच के नीयत, जमीर दूकानों मेंकुछ कुछ बाज़ार से कमाया जायेन तुम भूखे रहो न हम भूखे रहेदाना डालके चिडियां फंसाया जायेहो रौशन चांद की रात झक... [पूरी पोस्ट]
writer ritu raj
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[07 Feb 2010 00:40 AM]

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