भारतीय समाज - विषमताओं का दंगल

भारत दुर्दशा आज का भारतीय समाज अनेक विषमताओं में निमग्न है किन्तु उनसे जूझने का दम उसमें कहीं दिखाई नहीं दे रहा है. व्यक्ति को सबसे पहले रोटी चाहिए बिना संघर्ष के, तभी वह आगे की सोच सकता है. जिस वर्ग को रोटी उपलब्ध नहीं है वह इसे पाने के प्रयासों में तल्लीन हैं और यह... [पूरी पोस्ट]
writer देवसूफी राम कु० बंसल

भारतीय समाज

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[06 Feb 2010 19:50 PM]

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