डॉ. महेंद्र भटनागर के गीतों में अलंकारिक सौंदर्य [आलेख] – आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल'

साहित्य शिल्पी जगवाणी हिंदी को माँ वीणापाणी के सितार के तारों से झंकृत विविध रागों से उद्भूत सांस्कृत छांदस विरासत से समृद्ध होने का अनूठा सौभाग्य मिला है. संस्कृत साहित्य की सरस विरासत को हिंदी ने न केवल आत्मसात किया अपितु पल्लवित-पुष्पित भी किया. हिंदी सहित्योद्यान... [पूरी पोस्ट]
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महेंद्र भटनागर

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[06 Feb 2010 19:30 PM]

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