निश्छल बचपन

काव्य तरंग कोमल यादें मीठे सपने , दादा दादी सारे आपने गुड़ियाँ खिलोने गोटे की चुनर , सखी सहेली पनघट की डगर गाँव की खबरे बस्ती का झमेल , आँख मिचोली का वो खैलचाट पकोड़े की चटकार , मास्टरजी का डंडा माँ की फटकारदादाजी दिलाते उन जलेबियों की मिठास , नानी के तोहफे खासम... [पूरी पोस्ट]
writer RaniVishal

रानीविशाल द्वारा रचित

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[06 Feb 2010 18:51 PM]

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