बाबुल तेरे प्यार ने तो मुझे सिर पर चढ़ा लिया

हृदय गवाक्ष और आज फिर याद आया सब कुछ .....! पांडे जी की बेटियों को उनकी थाली में खाते देख याद आया आपका कौर तोड़ कर मिर्च अलग कर कर के खाना खिलाना। उन सबका मचलना देख कर याद आया अपना बचपन जो शायद आज ही के दिन बहुत हद तक खतम हो गया था।ऐसा नही कि आपके जाने के बाद ही आपकी... [पूरी पोस्ट]
writer कंचन सिंह चौहान
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[06 Feb 2010 18:30 PM]

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