बखान-हास्य कविता (bakhan-hasya kavita)

दीपक भारतदीप की शब्द प्रकाश-पत्रिका सचिव ने कहासमाज सेवक से कहा‘आ गया है जमकर चंदाचलेगा अपना जोरदार धंधाअपने हिस्से का सही अंदाज बतायेंतो शुरु करें अब गरीबों के नाम पर कल्यान।’समाज सेवक पहले चौंकेफिर बोले-‘अरे, क्या कहते हो,भला, क्यों जज़्बात में बहते हो,अभी तक नब्बे फीसदी थाअब सौ फीसदी कर... [पूरी पोस्ट]
writer दीपक भारतदीप

sher

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[06 Feb 2010 12:53 PM]

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