बादल का जन्मदिन

क्षितिज आवश्यक है कि मैं लिखूं.तुम्हारे जन्म दिन की तारीख़,मालूम ही न पड़ाकि यह बदली कब उमड़ी,और कब शब्द झंझावात बन उसे ले उड़े।कहां बरस कर वुलवुले फट पड़े।हरी हो गई सूखी दरार पड़ी धरतीउसने भी नहीं बताया पताउन बादलों का,तुम्हारा जन्म दिन उसे भी याद नहीं था।... [पूरी पोस्ट]
writer उषा वर्मा
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[06 Feb 2010 12:03 PM]

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