किसका जूता, किसका सर...

दिल-ए-नादाँ यह पहली बार नहीं हुआ है और हर बार नजरअंदाज किया गया हैं फर्क सिर्फ यह है कि इस मर्तबा ‘इस बार बार की गलती’ के साथ ऐसी शख्सियत का नाम जुड़ा है जिसे हम गुलजार के नाम से जानते हैं और जो हमारी नजरों में पाकीजा एहसास की तरह दर्ज रहा है। बिल्कुल उनके लिखे गीत... [पूरी पोस्ट]
writer संदीप पाण्डेय

सिनेमा

views
22
upvote
1
downvote
0
rating
1
comments
7
[06 Feb 2010 10:40 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix