किसका जूता, किसका सर...
यह पहली बार नहीं हुआ है और हर बार नजरअंदाज किया गया हैं फर्क सिर्फ यह है कि इस मर्तबा ‘इस बार बार की गलती’ के साथ ऐसी शख्सियत का नाम जुड़ा है जिसे हम गुलजार के नाम से जानते हैं और जो हमारी नजरों में पाकीजा एहसास की तरह दर्ज रहा है। बिल्कुल उनके लिखे गीत...
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संदीप पाण्डेय
सिनेमा
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[06 Feb 2010 10:40 AM]



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