चप्पल से निकला चुर्र-र

नया ठौर मैं जब भागते- भगाते देर शाम अपने मित्र शर्माजी के घर पहुंचा तो सांसें धौंकनी की तरह चल रही थी। देखा, शर्मा की धर्मपत्नी खलबला रही थीं और अपने ड्राइंग रूम में बैठे शर्माजी भिन-भिना रहे थे। उनके टीवी सेट पर एंकर्स चिचिया रहे थे। मंत्री ने राहुल भैय्या की... [पूरी पोस्ट]
writer संजीव

व्यंग्य

views
21
upvote
3
downvote
0
rating
3
comments
2
[06 Feb 2010 08:28 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix