चप्पल से निकला चुर्र-र
मैं जब भागते- भगाते देर शाम अपने मित्र शर्माजी के घर पहुंचा तो सांसें धौंकनी की तरह चल रही थी। देखा, शर्मा की धर्मपत्नी खलबला रही थीं और अपने ड्राइंग रूम में बैठे शर्माजी भिन-भिना रहे थे। उनके टीवी सेट पर एंकर्स चिचिया रहे थे। मंत्री ने राहुल भैय्या की...
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संजीव
व्यंग्य
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[06 Feb 2010 08:28 AM]



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