मैं मगर हारा नहीं हूँ
थक गया हूँ मैं भले हीमैं मगर हारा नहीं हूँ...वक़्त हो कितना भी कातिलवक़्त का मारा नहीं हूँ !!दीप मेरा आँधियों में लड़खड़ाता ही सहीपर जल रहा है....हौसला बोझिल हुआ सा डगमगाता ही सहीपर चल रहा है !रौशनी की लकीरें कुछ दिखें या न सही ,घबरा के दम को घोंट लूं ,...
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सागर
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[06 Feb 2010 07:23 AM]



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