चंचल बाला ठाकरे!

vyanjana बचपन में गली क्रिकेट खेलते हुए हममें से बहुतों ने खुद को स्टार माना है। हद दर्जे की बेसुरी आवाज़ के बावजूद सिर्फ ‘स्टेज पर गा लेने की हिम्मत’ के कारण हम कॉलेज के किशोर भी कहलाए। कॉलोनी में एक-आध को चपत लगा हम मोहल्ले के दादा भी हुए। मगर मान्यता का यही... [पूरी पोस्ट]
writer नीरज बधवार

(हास्य-व्यंग्य)

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[06 Feb 2010 00:41 AM]

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