एक ठो पद्मश्री इधर भी

Proud to be a कुमाउँनी चेली! मुझे विरोध करने की पुरानी आदत है| छात्रा-जीवन से ही हर वह पुरस्कार जो मुझे नहीं मिलता था, मैं उसका पुरजोर विरोध करती थी| मेरे द्वारा इतना हल्ला-गुल्ला मचाया जाता था कि पुरस्कार-समिति मजबूरन मेरा नाम अगले साल के लिए पुरस्कारों की लिस्ट में शामिल कर लेती... [पूरी पोस्ट]
writer Shefali Pande
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[05 Feb 2010 21:21 PM]

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