हरामी..? यानी हराम का जना हुआ “चर्चा हिन्दी चिट्ठों की”(ललित शर्मा)
अभी तीन चार दिनों से ब्लागवाणी की नापसंद सेवा का भरपुर लाभ उठाया जा रहा है। कुछ विशेष पोस्ट आते ही लगातार नापसंद की बाढ आ जाती है। मतलब यह है कि वही पो्स्ट ज्यादा पसंद की जा रही है और तो और कविताएं और गजल भी नापसंद होने लगी हैं। हमारे भाई लोग इतने जागरुक...
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ललित शर्मा
ललित शर्मा
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[05 Feb 2010 18:30 PM]



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