Muktak

साहित्य सर्जक जो जनता को नाच नचाते उन को गुंडे नचा रहे ताल एक हो जाये सब की तालीवे सब बजा रहे सब की मिली भगत होती है नेता अफसर गुंडों की नये साल में नाच नाच कर ऐसा ही वे बता रहे नाच नचाना और नाचना ये शासन का सूत्र यहाँ मंहगाई बस बढती जायेबस ये शासन का सूत्र यहाँ चीनी... [पूरी पोस्ट]
writer vedvyathit
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[05 Feb 2010 08:41 AM]

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