धर्म की नितांत दार्शनिक व्याख्या क्यूं।
अजीत कुमारधर्म को लेकर अपने अपने समय में दार्शनिकों की घोषणाएं चाहे जो भी रही हो। व्यवहारिकता के धरातल पर धर्म की अपरिहार्यता समाज में पहले भी थी और आगे भी रहेगी। ईश्वर को मृत मानने की नीत्शे की घोषणा से लेकर विचार और इतिहास के अंत तक की कई घोषणाएं की जा...
[पूरी पोस्ट]
संदीप पाण्डेय
अजीत की कलम
13
0
0
0
5
[05 Feb 2010 08:27 AM]



Shuffle








