तुम्हारी याद
रात्री के गहन अन्धकार मे, जब ये सारा जग सो जाता है,मेरे इन थकी हारी आँखों को नींद क्यों नहीं आती ।ढ़ूढ़्तीं रहती है, ना जाने पुराने यादों की गठरी मे कोई सामान,यादों की यह बोझ, मेरे ज़हन से, क्यों नहीं जाती ॥क्यों ढूढ़ता रहता हूँ, वो धूल की परत हटाकर,...
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dipayan
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[05 Feb 2010 05:59 AM]



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