द्वैत
देह में ऊपर से नीचे तक द्वैत हैया, संतुलन बैठाने की कोशिश।बुद्धि के दो पक्ष हैं।आंखें दो हैं,कि उल्टा और सीधा सब देखें।दायां और बांयां सब देखें।बोलों की तालियां बजाने के लिएदो अधर।संसार को गतिमान रखतीदो तरफ भुजाएं।दो कंधे।ह्रदय के भी दो वाल्व हैं।दो...
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Rajey Sha
कविता kavita
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[05 Feb 2010 05:33 AM]



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