घातक है संकीर्ण राजनीति का विष
सपनों के शहर मुंबई में इससे पहले ऐसा वातावरण कभी नहीं था। एक अंजान सी चेतावनी हमेशा कानों से टकराती रहती है। घर से बाहर न निकलो। घर में दुबककर रहो। घर से बाहर सड़क पर जाओगे तो वो दूसरे के क्षेत्र में होगा। सड़क के पार जाओगे तो वो भी किसी और का दायरा...
[पूरी पोस्ट]
Manoj Bajpayee
Blog Likhi mumbai
32
3
0
3
9
[05 Feb 2010 01:15 AM]



Shuffle








