जीत गयी तो पिया मोरे हारी पी के संग

अनुभव मेरा सोचना है कि सूफी दोहे में डूबने के बाद आपके पास शब्द कम पड़ जाते हैं क्योंकि आप शब्दों से काफी दूर निकल जाते हैं। ऐसे वक्त में आपकी अनुभूति का ग्राफ बढ़ जाता है। मुझे लगता है कि हमें शब्दों से परे कुछ सोचने की कला सूफी दोहे सीखाती है। अमीर खुसरो के... [पूरी पोस्ट]
writer गिरीन्द्र नाथ झा
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[05 Feb 2010 01:23 AM]

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