मैं भी बिकना चाहता हूं
मैं बिकना चाहता हूं। न न इसे मजाक न समझें। वाकई मैं बिकना चाहता हूं। बिककर बिकने का सुख भोगना चाहता हूं। देखना और महसूस करना चाहता हूं कि आखिर कैसा लगता है बिककर!वैसे खुद को बेचने का ख्याल मेरे मन में काफी दिनों से है। बस, मेरी संवेदनाओं और लोक-लाज का भय...
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अंशुमाली रस्तोगी
व्यंग्य
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[05 Feb 2010 00:42 AM]



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