मुम्बई का डॉन कौन
व्यंग्य-प्रमोद ताम्बटच्याइला! अपून एक-एक के कान के नीचे बजाएगा, कोई भंकस नहीं मँगता है। हिन्दी साइडर लोग को वार्निंग करके बोलता है कि इधर हँसने का तो मराठी में, रोने का तो मराठी में, गाना गाने का, खाना खाने का, सब मराठी में। कोई भी महाराष्ट्र के बाहेर का...
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प्रमोद ताम्बट
व्यंग्य
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[04 Feb 2010 22:39 PM]



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