अंतहीन कष्टों का जीवन झेलने का मजबूर एक दंपत्ति
पिछले दिनों अपनी एक पोस्ट में मैने बताया था कि लेखक का नजरिया ही किसी कहानी को सुखात्मक या दुखात्मक बनाता है। जीवन के सुखभरे समय में जब कहानी का अंत कर दिया जाता है , तो उसे सुखात्मक और जीवन के दुखभरे समय में कहानी का अंत कर दिया जाता है ,...
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संगीता पुरी
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[04 Feb 2010 21:43 PM]



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