बंद मुट्ठी [लघुकथा] - संजय जनागल

साहित्य शिल्पी श्रवण बहुत ईमानदारी से जिया और मरते दम तक ईमानादारी दिखा गया। अंत समय में भी श्रवण ने दवाईयाँ लेने से मना कर दिया। कहने लगा “इलाज में कमीशन, दवाईयों में कमीशन, लाश लेनी है तो कमीशन। बस कुछ भी देना है तो बंद मुट्ठी दे दीजिए। आखिर, कब तक लोग भ्रष्टाचार में... [पूरी पोस्ट]
writer साहित्य-शिल्पी

लघुकथा

views
17
upvote
1
downvote
0
rating
1
comments
2
[04 Feb 2010 19:30 PM]

Free Vedic Astrology From Astrobix