varsha

varsha घरकाटने को दौड़ता हैजब हम रहते हैंसिर्फ घर में*घरबहुत याद आता हैजब हम थक जाते हैंदुनियावी भागदौड़ में*घरछोड़ने का जी चाहता हैजब छिड़ी रहती है जंगआपस में*घरभूल जाता है कभीयार-दोस्तों की गप्पों मेंबीवी फोन कर बुलाती हैपति कोआ जाओ अबघर मेंबीवी रोज जिद करती... [पूरी पोस्ट]
writer वर्षा
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[04 Feb 2010 12:20 PM]

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