मुंबई जैसे तीन-चार आर्थिक राजधानी की हैसियतवाले शहर हो जाएं, तो विवाद ही खत्म हो जाए।
मुंबई किसकी है। आपकी, हमारी, सारे भारत की, या सिर्फ ठाकरे साहब की। सियासत में टकराव की बात हो आयी है। यहां इन नेताओं को कुछ कहने के लिहाज से क्या लिखा जाए, ये आपका-हमारा मन जानता है। क्षेत्र देश की मिट्टी से बड़े होते जा रहे हैं। राहुल गांधी को ये कहना...
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prabhat gopal
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[04 Feb 2010 11:12 AM]



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