"माँ तुम्हारी आरती में ही मेरा संसार है” (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री “मयंक”)
आपका माँ! दास पर उपकार है उपकार है। आपके आशीष ही, मेरे लिए उपहार है।। आपके बल से कलम-स्याही, सभी की बोलती, कण्ठ में हो आप तो, रसना सुधा सा घोलती, गीत-छऩ्दों में समाया, आपका आधार है। आपके आशीष ही, मेरे लिए उपहार है।। हो रहा सारा जगत्, रौशन तुम्हारे ज्ञान...
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डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक
वन्दना
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[04 Feb 2010 07:13 AM]



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