"माँ तुम्हारी आरती में ही मेरा संसार है” (डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री “मयंक”)

शब्दों का दंगल आपका माँ! दास पर उपकार है उपकार है। आपके आशीष ही, मेरे लिए उपहार है।। आपके बल से कलम-स्याही, सभी की बोलती, कण्ठ में हो आप तो, रसना सुधा सा घोलती, गीत-छऩ्दों में समाया, आपका आधार है। आपके आशीष ही, मेरे लिए उपहार है।। हो रहा सारा जगत्, रौशन तुम्हारे ज्ञान... [पूरी पोस्ट]
writer डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक

वन्दना

views
26
upvote
3
downvote
0
rating
3
comments
16
[04 Feb 2010 07:13 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix