क्यों बाँध रखी है ब्लॉगवाणी ने टिप्पणियों पर सीमा ?..........घुघूती बासूती

घुघूती बासूती हमारी माँगें हैं कि बढ़ती ही जा रही हैं, क्यों न बढ़ें जब ब्लॉगवाणी उन्हें पूरा करती हो !माँग उससे की जाती है जो माँग पूरी करे या जिस पर कोई अधिकार या स्नेह का रिश्ता हो। अब यह स्नेह चाहे इकतरफा हो या दुतरफा परन्तु हम लगे हाथ एक और माँग कर ही डालते हैं।... [पूरी पोस्ट]
writer Mired Mirage

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[04 Feb 2010 04:33 AM]

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