यारो,वो भी राहुल है और एक ये भी राहुल
साब आजकल टीवी देखने का तो धरमई नईं बचा, जाने कैसे कैसे नाटक आते हैं, एक जमाना था बुनियाद, हम लोग, दाने अनारे के, मिर्जा गालिब, गणदेवता, कब तक पुकारूं, चाणक्य जैसे सीरियल आते थे। भोपाल बीना पैंसेजर के जनरल डिब्बे में दो युवा उम्र को पार कर अधेड अवस्था की...
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satish aliya
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[04 Feb 2010 04:26 AM]



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