जिन्दा रहने पर पानी को तरसाए, मरने के बाद करे हो हल्ला से श्राद्ध
ये वाक्य पढ़ कर थोडा अजीब लगता है किन्तु वास्तव में आजकल ऐसा ही देखने एवम सुनने को मिलता है|कभीकभी बहुत आश्चर्य होता है कि आखिर लोग बदल कैसे जाते हैं| माता पिता कि तरफ से मुख कैसे मोड़ लेते है?जिम्मेदारियों से कैसे मुकर जाते है?मेरा एक अनुभव ये भी रहा है...
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Neelam Pande
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[04 Feb 2010 04:10 AM]



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