भोला इंसान

अंतर्द्वंद का आइना सुबह रात सी कालीआसमान में खुनी लाली खाली जूठी प्याली।भय से फैली आँखसमाचारों की टूटती साखमासूम सपनो की राख।गहरी जेबों का प्रहाररिश्तों को बेचते बाज़ारखोखले वादों की सरकार।शिक्षा का अभिमानभोला बड़ा तू इंसान व्यावहारिक नहीं तेरा ज्ञान.... [पूरी पोस्ट]
writer knkayastha

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[04 Feb 2010 01:23 AM]

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