" कल "
कलजब आई थीमैंक्यूँ नही बांधातुमनेप्रेमापाश मेंक्यूँ नहीपकड़ा दामनक्यूँ नहीडालीं पाँव मेंजंजीरेंअपने इंतज़ार कीक्यूँ नही दीदुहाईअपने जज्बातों कीक्यूँ नही सुनाईइक-इक पल मेंसौ- सौ बारमर- मर करजीने की दास्ताँअब कलफिर आऊँगीतब कह लेनाअनकही बातेंदिखा देनाअपनी...
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वन्दना
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[04 Feb 2010 00:13 AM]



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