अब तो फागुन आयो रे !

बैसवारी baiswari पिया मिलन का दर्द सताए,अपना कोई मिलने आए,खड़ी द्वार पर जिसे निहारूँ ,अब तो फागुन आयो रे !बासंती मौसम अब आया ,पतझड़ नयी कोंपलें लाया ,मैं प्रियतम पर वारी जाऊँ,अब तो फागुन आयो रे !सरसों फूल रही खेतों में,कोयल कूके है पेड़ों में,लगता है मैं भी कुछ गाऊँ ,अब तो... [पूरी पोस्ट]
writer संतोष त्रिवेदी ♣ SANTOSH TRIVEDI

कविता

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[20 Jan 2010 22:37 PM]

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