हम आंसू पीकर जीते है

काव्य तरंग हम आंसू पीकर जीते हैबस आंसू पीकर जीते हैफूल हटा कर कांटे दे दे ये इस दुनिया की रीते हैहम आंसू पीकर जीते हैकहने को तुम कुछ भी कह लोसारे काम हम करते हैरोज़ सुबह को जीते है और रोज़ शाम को मरते हैहम आंसू पीकर जीते हैपल पल दिन का याद करेजब सर तकिये पर धरते है... [पूरी पोस्ट]
writer RaniVishal

रानीविशाल द्वारा रचित

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[03 Feb 2010 20:07 PM]

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