चल मेरे मन तुझे तुझसे अलग होकर भी देखूं
मन के आगे हार है मन के आगे जीत ...हमारी हर कामना या गतिविधि का कारण हमारा मन ही है जो कभी दिल ...कभी दिमाग से संचालित होता है ...और कई बार दिल और दिमाग की रस्साकसी में इस बेचारे मन का कचूमर बन जाता है ....कितना अच्छा हो यदि कभी हम अपने आपको अपने मन से...
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[03 Feb 2010 18:41 PM]



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