अवधी उपन्यास- क़ासिद (15)

अवधी क्यार पहिला ब्लॉग अइसी आयशा आसमान तन निगाहें लगाए टुकुर टुकर देखि रहीं, वइसी टिल्लू क नींद नाई आ रही। ऊई अपने बिस्तर पर परे परे कुलबुला रहे। दादी याक दुई दांय लरिकवा तन देखेनि। टिल्लू जानौ आसमान म तारा गिनि रहे। दादी कित्तौ कड़क होएं लेकिन आखिर आहीं तो अम्मै ना। बिचरेऊ... [पूरी पोस्ट]
writer पंकज शुक्ल

आयत उल कुरसी

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[03 Feb 2010 13:39 PM]

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