हम्माल
हम्माल उस सियाले में अकस्मात जंगल की हवा में समाहित वनद्रुमों की मदनीय सुवास से नहाई शाम में घर लौटे धुलिया-मिटिया,धुरिया-धुरंग लगढग नग्न लीतड़ा पहने युगों से विशाल भार को काँधें लिये आदिम रहस से भरे अंतस की पहरेदारी करता वह हरहठ युवा हम्माल जिसकी सुदृढ़...
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Amitraghat
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[03 Feb 2010 11:44 AM]



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